Sunday, January 18, 2026

RSS शताब्दी बर्ष के सामाजिक एवं व्यक्तिगत संकल्प

 

*संघ (RSS) शताब्दी वर्ष के सामाजिक व व्यक्तिगत संकल्प*

1. मैं दांत साफ करते समय नल खुला नहीं रखूंगा।

2. मैं अपनी प्लेट में खाना नहीं रहने दूंगा, न ही खाना बर्बाद करूंगा।

3. मैं कागज के दोनों तरफ इस्तेमाल करूंगा और एक तरफ इस्तेमाल किए गए कागज के दूसरी तरफ का इस्तेमाल करूंगा। मैं कागज बचाने की पूरी कोशिश करूंगा।

4. मैं कहीं भी कचरा नहीं फेंकूंगा।

5. मैं उन सभी डिवाइस और चार्जर को तुरंत बंद कर दूंगा जो इस्तेमाल में नहीं हैं।

6. मैं AC, RO या वॉशिंग मशीन से निकलने वाले पानी का दोबारा इस्तेमाल करूंगा...

7. मैं नहाने के लिए शॉवर की जगह एक छोटी बाल्टी और टब का इस्तेमाल करूंगा।

8. मैं जब भी घर से बाहर निकलूंगा तो एक कपड़े का थैला ले जाऊंगा।

9. जब भी मैं बाहर जाऊंगा तो अपनी पानी की बोतल अपने साथ रखूंगा। 

10. अपनी गाड़ियों को धोने के बजाय, मैं उन्हें गीले कपड़े से साफ़ करूँगा।

11. दूध का पाउच या कोई भी पैकेट काटते समय, मैं उसे इस तरह काटूँगा कि ऊपर का कटा हुआ टुकड़ा उसमें लटका रहे।

12. मैं प्लास्टिक के पैकेट में स्नैक्स इस्तेमाल करने से बचूँगा। साथ ही, मैं पेपर-प्लास्टिक के कप में चाय और छाछ पीने से भी बचूँगा।

13. मैं लाइट वाले पंखे कम से कम इस्तेमाल करके, खिड़कियाँ और दरवाज़े खोलकर कुदरती हवा और धूप का इस्तेमाल बढ़ाऊँगा।

14. मैं घर के आँगन में चिड़ियों के लिए पानी का कटोरा रखूँगा और उनके लिए चना डालूँगा।

15. मैं छोटी दूरी के लिए पैदल चलूँगा या साइकिल का इस्तेमाल करूँगा।

16. जब मुझे सिग्नल पर या लाइन में इंतज़ार करना होगा तो मैं अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर दूँगा।

17. मैं AC का इस्तेमाल कम करूँगा और इस्तेमाल करते समय उसे 24 से 26 डिग्री पर रखूँगा।

18. मैं डिस्पोज़ेबल चीज़ों के बजाय दोबारा इस्तेमाल होने वाली चीज़ों का इस्तेमाल करूँगा। 19. मैं आज से कम से कम एक बाल्टी पानी बचाने की कोशिश करूँगा।

20. मैं अपने परिवार के खास दिनों पर एक पेड़ लगाऊँगा।

21. मैं सड़क के गलत साइड में गाड़ी नहीं चलाऊँगा।

22. मैं बिना सीटबेल्ट और हेलमेट के गाड़ी नहीं चलाऊँगा।

23. मैं गर्व से अपनी भाषा, संस्कृति, खाना, यात्रा, भजन और इमारतों को अपनाऊँगा, और स्वदेशी होने पर ज़ोर दूँगा।

24. मैं पर्यावरण को बचाने की पूरी कोशिश करूँगा।

25. मैं हमेशा अपने से बडो का आदर और सम्मान करूंगा।

Wednesday, January 14, 2026

खाटू श्याम बाबा जी (जाने कैसे मिला वरदान उन्हें)


 बर्बरीक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।


भीम के पौत्र बर्बरीक के समक्ष जब अर्जुन तथा भगवान श्रीकृष्ण उसकी वीरता का चमत्कार देखने के लिए उपस्थित हुए तब बर्बरीक ने अपनी वीरता का छोटा-सा नमूना मात्र ही दिखाया। कृष्ण ने कहा कि यह जो वृक्ष है ‍इसके सारे पत्तों को एक ही तीर से छेद दो तो मैं मान जाऊंगा। बर्बरीक ने आज्ञा लेकर तीर को वृक्ष की ओर छोड़ दिया।


जब तीर एक-एक कर सारे पत्तों को छेदता जा रहा था उसी दौरान एक पत्ता टूटकर नीचे गिर पड़ा। कृष्ण ने उस पत्ते पर यह सोचकर पैर रखकर उसे छुपा लिया की यह छेद होने से बच जाएगा, लेकिन सभी पत्तों को छेदता हुआ वह तीर कृष्ण के पैरों के पास आकर रुक गया। तब बर्बरीक ने कहा कि प्रभु आपके पैर के नीचे एक पत्ता दबा है कृपया पैर हटा लीजिए, क्योंकि मैंने तीर को सिर्फ पत्तों को छेदने की आज्ञा दे रखी है आपके पैर को छेदने की नहीं।


उसके इस चमत्कार को देखकर कृष्ण चिंतित हो गए। भगवान श्रीकृष्ण यह बात जानते थे कि बर्बरीक प्रतिज्ञावश हारने वाले का साथ देगा। यदि कौरव हारते हुए नजर आए तो फिर पांडवों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा और यदि जब पांडव बर्बरीक के सामने हारते नजर आए तो फिर वह पांडवों का साथ देगा। इस तरह वह दोनों ओर की सेना को एक ही तीर से खत्म कर देगा।


तब भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण का भेष बनाकर सुबह बर्बरीक के शिविर के द्वार पर पहुंच गए और दान मांगने लगे। बर्बरीक ने कहा- मांगो ब्राह्मण! क्या चाहिए? ब्राह्मणरूपी कृष्ण ने कहा कि तुम दे न सकोगे। लेकिन बर्बरीक कृष्ण के जाल में फंस गए और कृष्ण ने उससे उसका शीश मांग लिया।


बर्बरीक द्वारा अपने पितामह पांडवों की विजय हेतु स्वेच्छा के साथ शीशदान कर दिया गया। बर्बरीक के इस बलिदान को देखकर दान के पश्चात श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूजित होने का वर दिया। आज बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से पूजा जाता है। जहां कृष्ण ने उसका शीश रखा था उस स्थान का नाम खाटू है।


अनजाने रहस्य :


1. खाटू श्याम अर्थात मां सैव्यम पराजित:। अर्थात जो हारे हुए और निराश लोगों को संबल प्रदान करता है।


2. खाटू श्याम बाबा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हैं उनसे बड़े सिर्फ श्रीराम ही माने गए हैं।


3. खाटूश्याम जी का जन्मोत्सव हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।


4. खाटू का श्याम मंदिर बहुत ही प्राचीन है, लेकिन वर्तमान मं‍दिर की आधारशिला सन 1720 में रखी गई थी। इतिहासकार पंडित झाबरमल्ल शर्मा के मुताबिक सन 1679 में औरंगजेब की सेना ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। मंदिर की रक्षा के लिए उस समय अनेक राजपूतों ने अपना प्राणोत्सर्ग किया था।


5. खाटू श्‍याम मंदिर परिसर में लगता है बाबा खाटू श्याम का प्रसिद्ध मेला। हिन्दू मास फाल्गुन माह शुक्ल षष्ठी से बारस तक यह मेला चलता है। ग्यारस के दिन मेले का खास दिन रहता है।


6. बर्बरीक देवी के उपासक थे। देवी के वरदान से उसे तीन दिव्य बाण मिले थे जो अपने लक्ष्य को भेदकर वापस उनके पास आ जाते थे। इसकी वजय से बर्बरिक अजेय थे।


7. बर्बरीक अपने पिता घटोत्कच से भी ज्यादा शक्तिशाली और मायावी था।


8. कहते हैं कि जब बर्बरिक से श्रीकृष्ण ने शीश मांगा तो बर्बरिक ने रातभर भजन किया और फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को स्नान करके पूजा की और अपने हाथ से अपना शीश काटकर श्रीकृष्ण को दान कर दिया।


9. शीश दान से पहले बर्बरिक ने महाभारत का युद्ध देखने की इच्‍छा जताई तब श्रीकृष्‍ण ने उनके शीश को एक ऊंचे स्थान पर स्थापित करके उन्हें अवलोकन की दृष्टि प्रदान की।


10. युद्ध समाप्ति के बाद जब पांडव विजयश्री का श्रेय देने के लिए वाद विवाद कर रहे थे तब श्रीकृष्ण कहा कि इसका निर्णय तो बर्बरिक का शीश ही कर सकता है। तब बर्बरिक ने कहा कि युद्ध में दोनों ओर श्रीकृष्ण का ही सुदर्शन चल रहा था और द्रौपदी महाकाली बन रक्तपान कर रही थी।


11. अंत में श्रीकृष्ण ने वरदान दिया की कलियुग में मेरे नाम से तुम्हें पूजा जाएगा और तुम्हारे स्मरण मात्र से ही भक्तों का कल्याण होगा।

Monday, December 29, 2025

नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापना एवं मूर्ति का अनावरण( दान की महिमा)

दान केवल धन देने का नाम नहीं,

यह हृदय की करुणा और आत्मा की पवित्रता का प्रतीक है।

जो व्यक्ति निःस्वार्थ भाव से दान करता है,

वह अपने साथ-साथ समाज के जीवन में भी प्रकाश भर देता है।


दान से अहंकार मिटता है,

सेवा से संस्कार निखरते हैं,

और परोपकार से जीवन सार्थक बनता है।

कहा गया है— *“परोपकाराय पुण्याय, पापाय परपीड़नम्।”*


जिस हाथ से दान किया जाता है,

वह कभी खाली नहीं रहता।

दान से धन नहीं घटता,

बल्कि सुख, शांति और ईश्वर की कृपा बढ़ती है।


आइए, अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करें

और मानवता के इस श्रेष्ठ धर्म को जीवंत रखें। 🌼

तुलसी जी को कौन से रंग की चुनरी उड़ानी चाहिए


 तुलसी माता को लाल चुनरी चढ़ाने की गलती न करें, जानिए सही नियम हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि आस्था और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। लगभग हर घर के आंगन या बालकनी में तुलसी का पौधा अवश्य दिख जाता है।यह न केवल वातावरण को शुद्ध रखता है, बल्कि ऐसा माना जाता है कि जहाँ तुलसी होती है, वहाँ देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास होता है। हर साल तुलसी विवाह के शुभ अवसर पर भक्तगण तुलसी माता को सजा-संवारकर उनका विवाह भगवान शालिग्राम से कराते हैं।


इस दिन तुलसी को नई चुनरी, गहने, पुष्प और भोग अर्पित किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं - तुलसी माता को हर रंग की चुनरी चढ़ाना शुभ नहीं होता?


अधिकतर लोग लाल रंग की चुनरी अर्पित करते हैं, क्योंकि यह देवी लक्ष्मी का प्रिय रंग माना जाता है। मगर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुलसी पर लाल चुनरी चढ़ाना गलत प्रभाव भी डाल सकता है।


तुलसी और ग्रहों का संबंध


तुलसी का सीधा संबंध बुध ग्रह से माना गया है। तुलसी की पत्तियों का रंग हरा होता है और यह बुध ग्रह का प्रतीक है। बुध ग्रह बुद्धि, संवाद, समृद्धि और संतुलन का कारक होता है। इसीलिए जब हम तुलसी की पूजा करते हैं, तो हम बुध की कृपा भी प्राप्त करते हैं।


लेकिन जब तुलसी को लाल चुनरी (जो मंगल ग्रह का रंग है) चढ़ाई जाती है, तो यह ग्रहों का टकराव पैदा करता है - क्योंकि मंगल और बुध एक-दूसरे के शत्रु ग्रह माने जाते हैं।


लाल चुनरी क्यों नहीं चढ़ानी चाहिए तुलसी पर?


लाल रंग मंगल का प्रतीक है और यह ऊर्जा, क्रोध और प्रतिस्पर्धा से जुड़ा होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अगर तुलसी (जो बुध से संबंधित हैं) को लाल रंग की चुनरी पहनाई जाती है, तो यह घर में विवाद, धन की हानि या तनाव जैसी स्थितियाँ पैदा कर सकती है।


कुछ पंडितों का कहना है कि तुलसी पर लाल चुनरी चढ़ाने से घर की महिला सदस्यों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए इसे शुभ नहीं माना जाता।


तुलसी माता को कौन-से रंग की चुनरी चढ़ानी चाहिए?


अगर आप तुलसी माता को प्रसन्न करना चाहते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना चाहते हैं, तो चुनरी का रंग बहुत सोच-समझकर चुनें।


हरा रंग - यह बुध ग्रह का रंग है। यह संतुलन, बुद्धि और समृद्धि का प्रतीक है।


सफेद रंग - यह शांति और पवित्रता दर्शाता है। शुक्र ग्रह को भी यह रंग प्रिय है।


नीला रंग - शनि ग्रह का प्रिय रंग है। यह स्थिरता और मानसिक शांति देता है।


काला रंग - यह श्रीकृष्ण के श्याम स्वरूप से जुड़ा है। तुलसी विवाह में काली चुनरी चढ़ाना भक्ति और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।


इन रंगों की चुनरी अर्पित करने से घर में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है।


तुलसी को वस्त्र अर्पित करने का शुभ समय और विधि


तुलसी को चुनरी या वस्त्र सुबह सूर्योदय के बाद अर्पित करना सबसे शुभ माना गया है। रविवार और एकादशी के दिन तुलसी माता को वस्त्र चढ़ाना निषिद्ध है।


पूजा से पहले तुलसी को गंगाजल या दूध से स्नान कराएं, फिर हल्दी, सिंदूर, रोली और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा अनुसार हरे, नीले, सफेद या काले रंग की चुनरी उढ़ाएं।


चाहें तो तुलसी के पास शालिग्राम या श्रीकृष्ण की तस्वीर रखें - इससे तुलसी विवाह का पूर्ण फल मिलता है।


धार्मिक मान्यता और लाभ


तुलसी देवी लक्ष्मी माता का अवतार मानी जाती हैं, और उनका विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से होता है। तुलसी की नियमित पूजा से न केवल पाप नाश होता है, बल्कि घर में धन-धान्य, शांति और समृद्धि आती है।


सही रंग की चुनरी अर्पित करने से तुलसी पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए अगली बार जब आप तुलसी को सजाएं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चुनरी का रंग शुभ ग्रहों से मेल खाता हो।


तुलसी माता की पूजा सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि घर की उन्नति और सुख-शांति का माध्यम है। लाल चुनरी भले सुंदर लगे, लेकिन यह तुलसी के लिए अशुभ मानी जाती है।


इसलिए तुलसी माता को हमेशा हरी, नीली, सफेद या काली चुनरी पहनाएं और उनकी कृपा से जीवन में समृद्धि प्राप्त करें।

Sunday, October 26, 2025

 

#बिल्ववृक्ष-

1. #बिल्व_वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते l


2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका #मोक्ष हो जाता है l


3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है l


4. चार, पांच, छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्र पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है l 


5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है एवं बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।


6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।


7. बेल वृक्ष को सींचने से पित्र तृप्त होते है।


8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।


9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।


10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिव लिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी जीव सभी पापों से मुक्त हो जाते है l


11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है।

कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं l


#शिवजी की पूजा में ध्यान रखने योग्य बात l 


#शिव_पुराण के अनुसार भगवान शिव को कौन सी चीज़ चढाने से मिलता है क्या फल - 


किसी भी देवी-देवता का पूजन करते समय उनको अनेक चीज़ें अर्पित की जाती है। प्रायः भगवान को अर्पित की जाने वाली हर चीज़ का फल अलग होता है। शिव पुराण में इस बात का वर्णन मिलता है की भगवान शिव को अर्पित करने वाली अलग-अलग चीज़ों का क्या फल होता है। शिवपुराण के अनुसार जानिए कौन सा अनाज भगवान शिव को चढ़ाने से क्या फल मिलता है:


1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।


2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।


3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।


4. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में वितरीत कर देना चाहिए।


शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से उसका क्या फल मिलता है -


1. ज्वर (बुखार) होने पर भगवान शिव को जलधारा चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है। सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जलधारा द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है।


2. नपुंसक व्यक्ति अगर शुद्ध घी से भगवान शिव का अभिषेक करे, ब्राह्मणों को भोजन कराए तथा सोमवार का व्रत करे तो उसकी समस्या का निदान संभव है।


3. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।


4. सुगंधित तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है।


5. शिवलिंग पर ईख (गन्ना) का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।


6. शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।


7. मधु (शहद) से भगवान शिव का अभिषेक करने से राजयक्ष्मा (टीबी) रोग में आराम मिलता है।


शिव पुराण के अनुसार जानिए भगवान शिव को कौन का फूल चढ़ाया जाए तो उसका क्या फल मिलता है -


1. लाल व सफेद #आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है।


2. #चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।


3. #अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।


4. #शमी पत्रों (पत्तों) से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।


5. #बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।


6. जूही के फूल से शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।


7. #कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं।


8. #हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।


9. #धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर

 सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।


10. #लाल_डंठलवाला_धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।


11. #दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।

Monday, August 18, 2025

तीज स्नेह मिलन समारोह


 तन झूम झूम मन झूम झूम जाए

 कार्यक्रम  सचमुच एक ऐतिहासिक और यादगार रहा .. 


विधिवत संस्कार को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया थाl

सर्वप्रथम  बसंती द्वारा कान्हा जी की पूजा  दीप प्रज्वलन से शुरुआत की गई  आयोजक डॉ अर्चना  श्रेया द्वारा स्वागत उद्बोधन  तत्पश्चात   छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध  मंच संचालिका  सीमा साहू जी कोआमंत्रित किया .. 

जिन्होंने खूबसूरत ढंग से मंच का संचालन किया मुख्य अतिथि विशेष अतिथि को आमंत्रित किया फूलों की वर्षा और   अक्षत, कुंकुम  और  हल्दी के  तिलक से उनका स्वागत किया गयाl

मुख्य अतिथि के रूप में  शोभा श्रीवास्तव विशेष स्थिति के रूप में मिसेज साहू उपस्थित थीl

  बहुत ही खूबसूरत पल था जब डॉ श्वेता और उनकी मां विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थी... 

एक दूसरे का स्वागत कर रही थी और इस हसीन पल को यादगार बनाते हुए एंजॉय कर रही थीl

प्यारी सी मीठी   यादें देने वाला फल सबका मन को बहुत भायाl

    सीमा जी ने शानदार, लाजवाब और बेमिसाल संचालन किया अतिथियों के आमंत्रण के बाद सभी के विचार लिए गए. .. 


डॉ श्वेता साहू ने एकल डांस किया सीमा और डॉअर्चना ने एक छत्तीसगढ़ी गीत पर शानदार डांस किया... 

  गीत के  प्यारे से बोल थे

 बखरी के तुमानार बराबर मन है मोरे

 बहुत ही प्रसिद्ध और सुंदर पुराना गीत था... 

दोनों साहित्यकार  सखियाँ ने लाजवाब प्रस्तुति दी... 

 कुलविंदर ने पंजाबी स्टाइल में डांस किया 

रीमिक्स गाने पे

 सबनेअपने थीम को संचालित किया

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तन झूम झूम मन झूम झूम जाए

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सभी उपस्थित सखियों  केट वॉक अपने अपने अंदाज में कर सबका मन मोह  लिया l

जजों ने तीन लोगों को विजेता घोषित किया.. तीज  क्वीन के रूप में सीमा साहू चुनी गई

बेस्ट फेस डॉ श्वेता साहू

बेस्ट ड्रेस कुलविंदर कौर तीनों को सम्मानित किया गया l

ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी रखा गया था जिसके गिफ्ट सरोज आर्या द्वारा  रखा गया थाl

 उपस्थित सभी सखियों ने एक दूसरे का धन्यवाद किया आयोजक तो धन्यवाद के बरसात से  डूब गई.. 

अंत में आभार ज्ञापन के पश्चात सभी सखियों के द्वाराअपने हाथों  से बनाया हुआ  एक-एक आइटम से डिनर का आयोजन हुआ l

 यही वो पल होता है जब हम एक दूसरे से रूबरू होते हैं और उसकी खास प्रतिभा को  जान पाते हैंऔर पहचानते हैं इस तरह एक दिव्य भव्य आयोजन किया गया... 

  कान्हा के धन्यवाद से कार्यक्रम का समापन किया गया...

Sunday, August 10, 2025

गोत्र की शक्ति

 



क्या आप अपने गोत्र की असली शक्ति को जानते हैं? 

यह कोई परंपरा नहीं है। कोई अंधविश्वास नहीं है। यह आपका प्राचीन कोड है।


आपका गोत्र दर्शाता है — आप किस ऋषि की मानसिक ऊर्जा से जुड़े हुए हैं।

खून से नहीं, बल्कि विचार, ऊर्जा, तरंग और ज्ञान से।


हर हिंदू आध्यात्मिक रूप से एक ऋषि से जुड़ा होता है।

वो ऋषि आपके बौद्धिक पूर्वज हैं।

उनकी सोच, ऊर्जा, और चेतना आज भी आपमें बह रही है।


2. गोत्र का अर्थ जाति नहीं होता।

आज लोग इसे गड़बड़ा देते हैं।

गोत्र ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र नहीं दर्शाता।

यह जातियों से पहले, उपनामों से पहले, राजाओं से भी पहले अस्तित्व में था।


यह सबसे प्राचीन पहचान का तरीका था — ज्ञान पर आधारित, शक्ति पर नहीं।

हर किसी का गोत्र होता था।

ऋषि अपने शिष्यों को गोत्र देते थे जब वे उनकी शिक्षाओं को ईमानदारी से अपनाते थे।


इसलिए, गोत्र कोई लेबल नहीं — यह आध्यात्मिक विरासत की मुहर है।


3. हर गोत्र एक ऋषि से जुड़ा होता है — एक “सुपरमाइंड” से

मान लीजिए आप वशिष्ठ गोत्र से हैं — तो आप वशिष्ठ ऋषि से जुड़े हैं, वही जिन्होंने श्रीराम और दशरथ को मार्गदर्शन दिया था।


भृगु गोत्र?

आप उस ऋषि से जुड़े हैं जिन्होंने वेदों का हिस्सा लिखा और योद्धाओं को प्रशिक्षण दिया।


कुल 49 मुख्य गोत्र हैं — हर एक ऋषियों से जुड़ा जो ज्योतिषी, वैद्य, योद्धा, मंत्रद्रष्टा या प्रकृति वैज्ञानिक थे।


4.प्राचीन भारत में गोत्र एक जेनेटिक ट्रैकर था।

यह पितृवंश से चलता है — यानी पुत्र ऋषि की लाइन आगे बढ़ाते हैं।


इसलिए अगर एक ही गोत्र के दो लोग विवाह करें, तो वे आनुवंशिक रूप से भाई-बहन जैसे होंगे।

इससे संतान में मानसिक और शारीरिक विकार आ सकते हैं।


गोत्र व्यवस्था = प्राचीन भारतीय डीएनए विज्ञान

और यह हम हजारों साल पहले जानते थे — जब पश्चिमी विज्ञान को जेनेटिक्स का भी अंदाजा नहीं था।


5. गोत्र = आपका मानसिक प्रोग्रामिंग

चलो इसे व्यक्तिगत बनाते हैं।


कुछ लोग गहरे विचारक होते हैं।

कुछ में गहरी आध्यात्मिक भूख होती है।

कुछ को प्रकृति में शांति मिलती है।

कुछ नेता या सत्य के खोजी होते हैं।


क्यों?

क्योंकि आपके गोत्र के ऋषि का मन आज भी आपके अंदर गूंजता है।


अगर आपका गोत्र किसी योद्धा ऋषि का है — आपको साहस महसूस होगा।

अगर वह किसी वैद्य ऋषि से है — तो आयुर्वेद या चिकित्सा में रुचि हो सकती है।


यह संयोग नहीं — यह गहराई से जुड़ा प्रोग्राम है।


6. पहले गोत्र के आधार पर शिक्षा दी जाती थी

प्राचीन गुरुकुलों में सबको एक जैसा नहीं सिखाया जाता था।

गुरु का पहला प्रश्न होता था:

“बेटा, तुम्हारा गोत्र क्या है?”


क्यों?

क्योंकि इससे गुरु समझ जाते थे कि छात्र कैसे सीखता है, कौन सी विद्या उसके लिए उपयुक्त है।


अत्रि गोत्र वाला छात्र — ध्यान और मंत्रों में प्रशिक्षित होता।


कश्यप गोत्र वाला — आयुर्वेद में गहराई से जाता।


गोत्र सिर्फ पहचान नहीं, जीवनपथ था।


7. ब्रिटिशों ने इसका मज़ाक उड़ाया, बॉलीवुड ने हंसी बनाई, और हमने इसे भुला दिया

जब ब्रिटिश भारत आए, उन्होंने इसे अंधविश्वास कहा।


फिर फिल्मों में मज़ाक बना —

“पंडितजी फिर से गोत्र पूछ रहे हैं!” — जैसे यह कोई बेमतलब रस्म हो।


धीरे-धीरे हमने अपने बुज़ुर्गों से पूछना छोड़ दिया।

अपने बच्चों को बताना छोड़ दिया।


100 साल में 10,000 साल पुरानी व्यवस्था लुप्त हो रही है।


उसे किसी ने खत्म नहीं किया। हमने ही उसे मरने दिया।


8. अगर आप अपना गोत्र नहीं जानते — तो आपने एक नक्शा खो दिया है

कल्पना कीजिए कि आप किसी प्राचीन राजघराने से हों — पर अपना उपनाम तक नहीं जानते।


आपका गोत्र = आपकी आत्मा का GPS है।


सही मंत्र


सही साधना


सही विवाह


सही मार्गदर्शन


इसके बिना हम अपने ही धर्म में अंधे होकर चल रहे हैं।


9. गोत्र की पुकार सिर्फ रस्म नहीं होती

जब पंडित पूजा में आपका गोत्र बोलते हैं, तो वे सिर्फ औपचारिकता नहीं निभा रहे।


वे आपको आपकी ऋषि ऊर्जा से दोबारा जोड़ रहे होते हैं।


यह एक पवित्र संवाद होता है:

“मैं, भारद्वाज ऋषि की संतान, अपने आत्मिक वंशजों की उपस्थिति में यह संकल्प करता हूँ।”


यह सुंदर है। पवित्र है। सच्चा है।


10. इसे फिर से जीवित करो — इसके लुप्त होने से पहले

अपने माता-पिता से पूछो।

दादी-दादा से पूछो।

शोध करो, पर इसे जाने मत दो।


आप सिर्फ 1990 या 2000 में जन्मे इंसान नहीं हैं 


आप एक ऐसी ज्योति के वाहक हैं जो हजारों साल पहले किसी ऋषि ने जलाई थी।


11. आपका गोत्र = आत्मा का पासवर्ड

आज हम वाई-फाई पासवर्ड, नेटफ्लिक्स लॉगिन याद रखते हैं...


पर अपने गोत्र को भूल जाते हैं।


वो एक शब्द — आपके भीतर की


चेतना


आदतें


पूर्व कर्म


आध्यात्मिक शक्तियां


…सब खोल सकता है।


यह लेबल नहीं — यह चाबी है।


12. महिलाएं विवाह के बाद गोत्र “खोती” नहीं हैं

लोग सोचते हैं कि विवाह के बाद स्त्री का गोत्र बदल जाता है। पर सनातन धर्म सूक्ष्म है।


श्राद्ध आदि में स्त्री का गोत्र पिता से लिया जाता है।

क्योंकि गोत्र पुरुष रेखा से चलता है (Y-क्रोमोज़ोम से)।

स्त्री ऊर्जा को वहन करती है, लेकिन आनुवंशिक रूप से उसे आगे नहीं बढ़ाती।


इसलिए स्त्री का गोत्र समाप्त नहीं होता — वह उसमें मौन रूप से जीवित रहता है।


13. भगवानों ने भी गोत्र का पालन किया

रामायण में श्रीराम और सीता के विवाह में भी गोत्र जांचा गया


राम: इक्ष्वाकु वंश, वशिष्ठ गोत्र


सीता: जनक की पुत्री, कश्यप गोत्र,

Monday, July 7, 2025

हृदय का डॉक्टर


 अर्जुन के पेड़ मानव शरीर के लिये औषधि गुण से भरा हुआ है पत्ते फल फूल छाल सभी औषधि प्रयोग में आता है । 

अगर आपका हार्ट 80% ब्लॉकेज हो गया है डॉक्टर स्टैंड लगाने का अनुमति दे चूका है तो आप इस नुस्खे को आजमाकर देखे तरीका :-

1.अर्जुन की छाल 100 ग्राम 

2. दालचीनी          50 ग्राम 

3. तेज पत्ता           20 ग्राम 

4.मेथी दाना           50 ग्राम 

5.कालोंजी             50 ग्राम 

6.अलसी बीज        50 ग्राम 

सभी मिलाकर कूटकर दरदरा पाउडर बना लें ज्यादा बारीक़ पाउडर ना बनाये। रात को 400ml पानी को किसी ताम्बा के बर्तन में डाल कर 10 ग्राम इस चूर्ण को भिगो दें सुबह इस पानी को छानकर दो हिस्से में बाँट लें आधा सुबह आधा शाम को खाली पेट इस्तेमाल करें। रोजाना दो से तीन महीने तक करने से किसी भी प्रकार का ब्लॉकेज ह्रदय हो या नस पूरी तरह खुल जाती है ।


गर हार्ट बिट 50 से भी कम है तो आप अनारदाना एक चम्मच , पुदीना 10 ,15 gram पत्ते और लहसुन चार दाने 1 इंच अदरक का टुकड़ा हरी मिर्च एक या दो स्वाद अनुसार इसकी सिल पर पीस का चटनी बनाकर रोज खाएं  एक समय खाने के साथ जरूर खाएं  ज्यादा मेहनत का काम ना करें  मॉर्निंग वॉक जरूर करें  लेकिन बहुत ज्यादा नहीं दौड़े नहीं  और डॉक्टर से सलाह जरूर ले,,


हृदय  का राजा क्यों कहा गया है अर्जुन छाल को ???? 


अर्जुन एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जो विशेष रूप से हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानी जाती है। आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को दिल की मांसपेशियों को मजबूत करने, उन्हें टोन करने और हृदय को ऊर्जा देने के लिए एक प्रमुख औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। अर्जुन की छाल का सेवन हृदय के सभी पहलुओं का समर्थन करने और इसके स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।

शरीर में आई सूजन को घटाने के लिए भी अर्जुन की छाल अच्छी मानी गई है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन घटाते हैं


अर्जुन की छाल के मुख्य फायदे:


1. हृदय को मजबूत बनाती है – अर्जुन छाल रक्त संचार को सही रखती है और हृदय की धमनियों को स्वस्थ बनाए रखती है।


2. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती है – हाई ब्लड प्रेशर और लो ब्लड प्रेशर दोनों को संतुलित करने में मददगार है।


3. कोलेस्ट्रॉल कम करती है – खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में सहायक है।


4. दिल की धड़कन को नियंत्रित करती है – अनियमित धड़कनों (Arrhythmia) को सही करने में मदद करती है।


5. ब्लड शुगर को नियंत्रित करती है – मधुमेह के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद है।


6. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर – शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करके एंटी-एजिंग प्रभाव डालती है।


7. लिवर और किडनी के लिए लाभकारी – यह लिवर को डिटॉक्स करने और किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करती है।


8. तनाव और चिंता को कम करती है – यह एक प्राकृतिक एडेप्टोजेन है, जो मानसिक शांति देती है।


9. पाचन में सुधार – अपच, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में फायदेमंद होती है।


10. घाव भरने में मदद करती है – त्वचा के घावों को जल्दी भरने में उपयोगी है।


अर्जुन की छाल का उपयोग कैसे करें?

आयुर्वेदिक चिकित्सक के अनुसार, अर्जुन की छाल का सबसे प्रभावी उपयोग अर्जुन की छाल की चाय के रूप में होता है। 


1. अर्जुन चाय – 1 चम्मच अर्जुन की छाल पाउडर को 1 कप पानी में उबालकर दिन में 1-2 बार पिएं।


2. अर्जुन दूध – आधा चम्मच अर्जुन छाल पाउडर को 1 गिलास दूध में उबालकर सेवन करें।


3. कैप्सूल या टैबलेट – आयुर्वेदिक स्टोर्स में उपलब्ध अर्जुन कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं।


सावधानियाँ:


गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।


किसी भी दवा के साथ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।


अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द या एसिडिटी हो सकती है।


अगर आप इसे अपने डेली रूटीन में शामिल करना चाहते हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।।।


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Saturday, May 31, 2025

* अहिल्या बाई होलकर को श्रद्धा सुमन अर्पित करती रचना*




 


*श्रद्धा सुमन अर्पित करती एक भावपूर्ण कविता:*

*दीपथींजो आंधियों में भी जलती रहीं*

**धर्म-धरा की दीप-ज्योति, अहिल्या माँ महान,
नारी शक्ति की मिसाल थीं, थीं सत्य का विधान।
त्याग-तपस्या की प्रतिमा, ममता की मूरत,
जननी, शासक, संत बनी, हर रूप में पूज्य थीं |

राजसिंहासन पे बैठी, पर मन में था धैर्य,
हर निर्णय में नीति बसी, न छल, न कोई वैर।
किले नहीं, मंदिर बनाए, गंगा-तीरे घाट,
भक्ति में लीन हो गईं, बनकर माँ की बात।

तीर्थों को संवार दिया, उजड़ा जहाँ, वहाँ प्राण,
काशी, गया, द्वारका बोले – ‘जय अहिल्या महान!’
अन्याय से लड़ीं नहीं तलवारों की मार से,
बलिदान हुआ उनका, सेवा-संस्कार से।

मातृभूमि की शान बनीं, नारी गरिमा का नाम,
आज भी गूंजे स्वर उनका, लेके सच्चा प्रणाम।
जयंती पर प्रण करते हैं, चरित्र को अपनाएं,
अहिल्या माँ की राह चलें, सच्ची सेवा दिखाएं।

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**आपका जीवन हमारे लिए प्रेरणा है।**
स्वरचित 
तनुजा

Wednesday, May 28, 2025

**महिला स्वास्थ्य के प्रति कितनी सचेत हैं आप??**

स्वस्थ समाज की कल्पना तभी की जा सकती है जब उसकी आधी आबादी, यानी महिलाएँ, शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण रूप से स्वस्थ हों। किंतु आज भी यह एक कड़वा सच है कि अधिकतर महिलाएँ अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देतीं। वे परिवार, बच्चों, घर और कार्यस्थल की ज़िम्मेदारियों में इस कदर उलझ जाती हैं कि स्वयं की देखभाल को अनदेखा कर देती हैं। यह लापरवाही धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती है।


भारत जैसे देश में महिलाओं को बचपन से ही त्याग, सहनशीलता और सेवा की मिसाल बना दिया जाता है। वे अपने स्वास्थ्य की शिकायत करना एक प्रकार की कमजोरी समझती हैं। मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति, पोषण, मानसिक तनाव, स्तन और गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करना आज भी एक वर्जना है। यह चुप्पी कई बार जानलेवा सिद्ध हो सकती है।


विशेष रूप से किशोरियों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया एक बड़ी चिंता का विषय है। आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन की कमी से महिलाओं में कमजोरी, थकान, और प्रसव संबंधी जटिलताएँ आम हो जाती हैं। इसके समाधान हेतु संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है।


महिलाएँ अक्सर मानसिक तनाव, अवसाद और चिंता का शिकार होती हैं, परन्तु वे इसे समाज के डर से व्यक्त नहीं कर पातीं। घरेलू हिंसा, सामाजिक अपेक्षाएँ, आर्थिक निर्भरता और कार्यस्थल का तनाव उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं।


#**क्या करें महिलाएँ स्वयं के लिए?**


* **नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।**

* **मासिक धर्म और प्रजनन स्वास्थ्य के विषय में सही जानकारी प्राप्त करें।**

* **संतुलित आहार और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।**

* **मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और ज़रूरत पड़े तो विशेषज्ञ से परामर्श लें।**

* **स्वयं को प्राथमिकता देना अपराध नहीं, आत्मसम्मान है।**


### **परिवार और समाज की भूमिका**


परिवार के सदस्य, विशेष रूप से पति, माता-पिता और संतान, को महिला की देखभाल में सहयोगी बनना चाहिए। समाज को चाहिए कि वह महिला स्वास्थ्य पर खुले मंच बनाए, जागरूकता फैलाए और उनकी जरूरतों को समझे।


स्वस्थ महिला न केवल स्वयं के लिए, बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए शक्ति का स्रोत होती है। अतः यह समय है स्वयं से यह प्रश्न करने का—**"मैं अपने स्वास्थ्य के प्रति कितनी सजग हूँ?"** क्योंकि एक जागरूक महिला ही स्वस्थ राष्ट्र की आधारशिला रख सकती है।


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स्वरचित 

तनुजा शुक्ला 

उत्तर प्रदेश

RSS शताब्दी बर्ष के सामाजिक एवं व्यक्तिगत संकल्प

  *संघ (RSS) शताब्दी वर्ष के सामाजिक व व्यक्तिगत संकल्प* 1. मैं दांत साफ करते समय नल खुला नहीं रखूंगा। 2. मैं अपनी प्लेट में खाना नहीं रहने ...