Wednesday, May 28, 2025

अंतर्राष्ट्रीय श्रेया क्लब द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी

*अंतर्राष्ट्रीय श्रेया क्लब की भव्य ऑनलाइन काव्य गोष्ठी सम्पन्न*


बैंगलोर। साहित्य की सुदीर्घ परंपरा में नारी स्वर हमेशा से शक्ति, संवेदना और सृजन का पर्याय रहा है। इसी शृंखला में अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी ने स्त्री स्वर को नई ऊँचाई दी और साहित्यिक अभिव्यक्ति की नई दिशाएँ खोलीं।


इस विशिष्ट आयोजन में भारत सहित विदेशों से 18 प्रतिभाशाली कवयित्रियों ने भाग लिया। इस अवसर पर विविध साहित्यिक विषयों पर स्वरचित कविताएँ प्रस्तुत की गईं। कहीं मातृत्व की ममता छलकी, कहीं नारी शोषण पर प्रहार किया गया, कहीं राष्ट्र के लिए समर्पण की पुकार सुनाई दी तो कहीं पर्यावरण संरक्षण की चेतना गूँजी।


मॉरीशस से जुड़ी कार्यक्रम की अध्यक्ष डाक्टर चंदा गुप्ता नेह जी  ने अपने उद्बोधन के साथ कार्यक्रम के शुरुआत करने की अनुमति की  प्रदान की तत्पश्चात  तनुजा शुक्ला जी ने सरस्वती वंदना , मुझको अगम स्वर ज्ञान दो  की प्रस्तुति दी इसी क्रम में ममता सक्सेना जी ने गणेश  वंदना का  गान किया तत्पश्चात राखी जी ने कार्यक्रम का विधिवत संचालन किया और काव्य पाठ प्रारंभ हुआ विना सरस्वती वंदना और गणपति वंदना के कोई भी कार्यक्रम सफल नही हो सकता जब तक इनकी उपस्थित न हो


गोष्ठी का सफल संचालन राखी पुरोहित ने किया, जिन्होंने हर कवयित्री की प्रस्तुति को भावपूर्ण भूमिका के साथ जोड़ा, जिससे कार्यक्रम की प्रवाहमयी ऊर्जा बनी रही। संस्थापक डॉ. अर्चना श्रेया ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि कविता केवल शब्दों की सजावट नहीं, बल्कि संवेदना का आईना है। जब महिलाएँ अपनी चेतना को शब्दों में ढालती हैं, तो वह कविता नहीं, चेतावनी, दर्पण और बदलाव की चिंगारी बन जाती है।


मुख्य अतिथि प्रेमलता रसबिंदु (गोरखपुर) ने इस अवसर पर कहा कि कविता वह शक्ति है, जो समाज को भीतर से झकझोरती है। आज की स्त्रियाँ सिर्फ लिख नहीं रहीं, वे सामाजिक बदलाव की अग्रदूत बन रही हैं।


विशेष अतिथि डॉ. प्रतिभा गर्ग (सिंगापुर) ने अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से विचार साझा करते हुए कहा कि भाषा की सीमाएँ मिट रही हैं। ऑनलाइन मंचों ने विश्वभर की स्त्रियों को एक साझा साहित्यिक मंच दिया है, जहाँ वे अपने अनुभव साझा कर रहीं हैं।


आलोचक की भूमिका में डॉ. आनंदीसिंह रावत ने हर कविता की साहित्यिक समीक्षा की। उसके प्रतीक, भाषा-शैली और प्रभाव पर सारगर्भित टिप्पणी करते हुए कहा कि कविताओं में स्त्रियों की आवाज़ न केवल भावुक थी, बल्कि वैचारिक रूप से परिपक्व और रचनात्मक दृष्टिकोण से समृद्ध थी। अध्यक्षता चंदा गुप्ता ने की। राखी पुरोहित ने कल तलक थे जो हमारे वो हमारे ना रहे… गीत सुनाया। 


गोष्ठी में प्रस्तुत कविताएँ न केवल भावनात्मक थीं, बल्कि गंभीर सामाजिक सरोकारों को रेखांकित करती रहीं। देशभक्ति पर कविताओं ने मातृभूमि के प्रति आस्था, बलिदान की चेतना और नई पीढ़ी को देशसेवा का संदेश दिया।


मातृत्व की अनुपम ममता, त्याग और अंतर्मन की गहराइयों को उजागर करतीं पंक्तियाँ नारी शोषण- सामाजिक रूढ़ियों, हिंसा, मौन पीड़ा और नारी जागरण की पुकार।

भक्ति रस- राम, कृष्ण, शिव और देवी स्वरूपों को समर्पित भजनों जैसे भाव, जिसमें भक्ति में डूबी भावनाएँ मुखर हुईं।

पर्यावरण चेतना- प्रकृति के विनाश की ओर इशारा करती कविताएँ, साथ ही हरियाली बचाने का आग्रह किया। 


सांस्कृतिक प्रभारी तनुजा शुक्ला ने कार्यक्रम के पारंपरिक पक्षों की देखरेख करते हुए सुनिश्चित किया कि कविताओं की प्रस्तुति के दौरान भारतीय सांस्कृतिक तत्व भी उभरें। आयोजन की संयोजक मीता लुनिवाल ने कार्यक्रम के तकनीकी और समयबद्ध संचालन को अत्यंत सुचारु रूप से निभाया।


डॉ. स्वर्णरेखा मिश्रा, शिखा पांडे, डॉ. संजीदा खानम, नेहा वार्ष्णेय, डॉ. अंबे कुमारी, डॉ. पुष्पा जैन, शालिनी श्रीवास्तव, नीरजा शर्मा, शोभारानी तिंवारी, अनिता श्रीवास्तव, संजू पाठक, डॉ. सुमन मेहरोत्रा, रेखा श्रीवास्तव सहित सभी कवयित्रियों ने अपने विशिष्ट स्वर में सामाजिक, भावनात्मक और वैचारिक विषयों पर कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें एक ओर भारतीय लोकबिंब उभरे, तो दूसरी ओर आधुनिक यथार्थ के सशक्त चित्र भी रचे गए।


प्रतिभागी कवयित्रियों की कविताओं से “मैं चुप नहीं रहूँगी अब, हर अन्याय के विरुद्ध बोलूँगी, तेरे तमाचे नहीं डराएंगे, मैं नारी हूँ, टूटकर भी फिर से डोलूँगी…”। “माँ! तेरे आँचल में बसी गाथा है बलिदानों की, तेरे आँसू भी प्रार्थना हैं, तेरी मुस्कान संजीवनी…”। “हवा में जहर घुला है, पेड़ रो रहे हैं, क्या अब भी नहीं जागोगे, जब जंगल भी पूछ रहे हैं…”।


अंतरराष्ट्रीय श्रेया क्लब जैसे मंच आज आधुनिक तकनीक के साथ साहित्यिक परंपरा को जोड़ रहे हैं। इस आयोजन ने यह प्रमाणित कर दिया कि साहित्य केवल पन्नों पर सिमटा विषय नहीं, बल्कि डिजिटल मंचों पर सजीव और सशक्त संवाद बन चुका है। मंजूषा दुग्गल जी ने भी अपना काव्य पाठ कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया बहुत ही मनमोहक प्रस्तुति के साथ 


डॉ. अर्चना श्रेया ने समापन वक्तव्य में कहा कि यह आयोजन केवल एक गोष्ठी नहीं था, यह नारी चेतना, सामाजिक संवाद और साहित्यिक उत्तरदायित्व की त्रिवेणी था। हम इसे हर माह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं।


 कार्यकारिणी समिति

 डॉ अर्चना श्रेया संस्थापक

 तनुजा शुक्ला सांस्कृतिक प्रभारी

 मीता लुनिवाल संयोजक

3 comments:

  1. Shandar , saargarbhit,bhavpurna karykram, Archanaji, Tanuja avam Meetaji ko hardik badhiyan👏👏🎉🎉

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  2. वाह शानदार आयोजन और सभी की भावपूर्ण उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ 👏👏💐💐 आदरणीय अर्चना जी व सम्पूर्ण टीम को बधाई

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  3. बहुत सुंदर शानदार आयोजन
    सुंदर एवं सफल आयोजन हेतु आयोजक मंडल को बहुत बहुत बधाई हार्दिक शुभकामनाएं।

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