Sunday, May 11, 2025

मदर्स डे (11/05/2025)

आज मदर्स डे है । मुनव्वर राणा की गजल का एक शेर "ये ऐसा कर्ज है जो मैं अता कर ही नहीं सकता, मैं जब तक घर ना लौटूं  मां मेरी सजदे में रहती है।" 28/02/2024 को लगभग 11:00 बजे लाली दीदी का फोन आया " मम्मी शांत हो गई हैं तुम जल्दी आ जाओ" ये बोलकर उन्होंने फोन काट दिया। मैं रिलायंस के आफिस में दिल्ली में था। बिना देर किए, मैं होटल जहां मैं रुका हुआ था पहुंचा और प्राइवेट गाड़ी करके वहां से कानपुर के लिए निकला। सर्दियों का मौसम था और हाईवे पर फा्ग भी बहुत था।  इस बीच रेनू का भी फोन आया कि यदि आप 4:00 बजे तक नहीं पहुंच सकते तो फिर ताई जी को आज रात में रखना होगा। मैंने भी स्पष्ट रूप से बताया कि मेरा उस समय तक पहुंचना मुश्किल है।  मुझे लगभग 8 घंटे लगे और मैं रात करीब 8:00 बजे कानपुर पहुंचा। दीदी के गार्डन में शेड के नीचे आइस काफिन में मम्मी के अंतिम दर्शन किए। लोगों का आना-जाना लगा हुआ था। गुड्डा दीदी अपने बेटे के साथ पहुंची हुई थी ।रात्रि लगभग 12:00 बजे कल्याणपुर की विधायका नीलिमा कटियार जी आई, उन्होंने लाली दीदी को अपने गले लगा लिया ।खैर माँ के न रहने के बाद मेरे लिए मां बाप का साया हमेशा के लिए खत्म हो गया।अभी बहुत भावुक कर देने वाली पंक्तियां पढ़ी । *"प्रतिमा में ईश्वर नहीं प्रति मां में ईश्वर है।"* पंक्तियों ने मन को निचोड़ दिया है । मुन्ना भी लगभग रात 2:00 बजे  राजकोट से लखनऊ होते हुए कानपुर पहुंचे। पूरी रात हम लोग मम्मी के पास बैठे रहे जिसमें मैं, मुन्ना ,दीदी ,राजू भाई साहब, लाली दीदी, प्रियंका थे। प्रियंका बीच-बीच में चाय बना कर दे रही थी। सुबह लगभग 5:00 बजे मैं दीदी के कमरे में गया और थोड़ा सा सोने की कोशिश कर रहा था। लेकिन दीदी सुबह 5:30 से ही मम्मी की अंतिम विदाई की भव्य तैयारी में लग गई थी । फूलमाला से लेकर अन्य व्यवस्थाओं के लिए संबंधित लोगों को फोन लगा रहीं थी। बब्बन भाई साहब भी उनकी आवश्यक मदद कर रहे थे। सूर्योदय तक लगभग सारी व्यवस्थाएं हो चुकी थी।भारी मन से सभी ने चाय के साथ थोड़ा सा नाश्ता किया। बिट्टू भी रात्रि में कानपुर के लिए निकल चुका था और वह भी लगभग 11:00 बजे दादी की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंच गया। हम अपनी माँ को गंगा मैया को सौंप आए ,माँ की अंतिम इच्छा भी  यही थी। इस समय पोस्ट लिखते समय आँखों मे आँसू है ,सब धुंधला दिख रहा है मुझे ।माँ याद आ रही है मुझे। मम्मी के जाने के बाद भी मैंने उनका फोन नम्बर डिलीट नहीं किया है अभी तक। पापा के न रहने पर उनका फोन नम्बर मैंने डिलीट कर दिया था। क्योंकि पापा भी दिखाई ना देने के कारण मम्मी के फोन से ही फोन लगवाते थे।मगर मम्मी का फोन नम्बर आज भी "मम्मी राऊ" के नाम से सेव है। विचारों की उथल पुथल और भावुकता से भरा हुआ इस वक्त मुझे जाने क्या सूझा और उनका नम्बर डायल कर दिया । शायद मन मे ये था कि उनका नम्बर अब तक किसी को टेलीकॉम कंपनी ने एलॉट कर दिया होगा ।जिस भी किसी को ये नम्बर एलॉट होगा उससे बात करूंगा , कहूंगा कि ये मेरी मम्मी का नम्बर है ,अब आपके पास है तो आपको हैप्पी मदर्स डे बोलना है । मगर फोन के दूसरी तरफ बस इतना ही सुनाई दिया ....... इस रूट की सभी लाइने व्यस्त हैं ....😢😢😢😢😢 खैर, मम्मी के जाने के बाद अब दीदी को अपनी मां के रूप में देख पाता हूं। "मां की सब खूबियां, बेटी में चली आई हैं, मैं तो सो जाता हूं पर वो तो जगा करती है।" हम सबका वैसे ही चोटीसे छोटी बात का ध्यान रखती हैं जैसे मम्मी रखतीं थीं। मम्मी की याद में। मनु इंदौर।

3 comments:

  1. प्रतिबिंब हैं हम सब मां तुम्हारे।
    शुभाशीष की बाट निहारे।।
    करना आशीषों की वर्षा
    हों मुश्किल में जब हम सारे
    🙏🙏🙏🌺🌺🙏🙏🙏
    We miss you Maa

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  2. जब तक घर ना लौटूं मां सजदे में रहती है।
    अपने बच्चों से जितनी ममता एक मां को होती है किसी और को नहीं ....
    मंजुला....

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