Thursday, April 24, 2025

शादी की वर्ष गांठ 24अप्रैल

24 अप्रैल, 1985 ,वह विशिष्ट दिन था जब पापा के परिवार की पहली बेटी की शादी हुई । भुलाए ही नहीं भूलता जब 25 अप्रैल को आपकी की विदाई हुई तो आप और भाई साहबकार में बैठकर जा रहे थे और पीछे से दो बच्चे आपकी कार के पीछे दौड़ रहे थे, यह चिल्लाते , रोते हुए कि मेरी दीदी कहां चली जा रही है? पापा ! देखो दीदी कहां चली जा रही हैं। उनको लेकर आओ। कार आगे आगे अपनी स्पीड में बढ़ती जा रही थी और दोनों बच्चे उसके पीछे भागने की कोशिश कर रहे थे। दौड़कर पापा को किसी ने बताया देखो साब, आपके दोनों बेटे कार के पीछे दौड़ रहे हैं । फिर पापा के ऑफिस के लोगों ने और दोनों मामा ने उनको पकड़ कर वापस लाया और चुप कराया यह समझाते हुए, बेटे, दीदी की शादी हो गई है, इसलिए वह अपनी ससुराल जा रहीं हैं। कुछ दिन बाद वापस आएंगी, फिर चली जाएंगी। शादी की तैयारी करते-करते पापा अक्सर आपसे कहने लगते थे। देखो ,दीदी ! हमने तुम्हें बेटों की तरह ही पाला है । विदाई के समय तुम रोना मत, नहीं तो हम अपने आप को संभाल नहीं पाएंगे। बड़ा अजीब सा लग रहा है तुम्हारी शादी की तैयारियां करते हुए, और सच तो यही है कि शादी तो करनी ही है। भाईसाहब के रूप में पापा को एक बड़ा बेटा भी मिल गया था। शायद मेरे बाद होने वाला भाई पापा का दामाद बन कर बड़े बेटे के रूप में ही परिवार में शामिल हुए । और .........देखते ही देखते समय बीतता गया। पापा मम्मी ने अपनी चारों चिड़ियां चार दिशाओं में फुर्र से उड़ा दीं। लाली उनसे कहती रही पापा आप कभी बूढ़े मत होना ( इस संदर्भ में एक और भावुक कर देने वाली कहानी है।) पापा का मन कभी बूढ़ा नहीं हुआ परंतु उनकी शिथिल काया जवाब देने लगी। उन्होंने चार बेटियों को विदा करने के बाद दो और बेटियों को बेटों की शादी के बाद लाया और संभवतः उन्होंने उनको बेटियों का दर्ज़ा देने की भरपूर कोशिश भी की। तब तक दोनों और शिथिल हो चुके थे। यह सब स्मृतियां मानस पटल पर विशेष अवसरों पर आ ही जाती हैं परंतु इनका स्मरण करने हेतु ना तो पापा मम्मी है, ना वह दोनों छोटे बच्चे इस उम्र में थे कि उन्हें यह सारी बातें याद हों ।अंजू दीदी तो दुनिया से असमय विदाई लेकर ही चलीं गईं। अब याद करे भी तो कौन, कभी-कभी अतीत की यादें भी एक दूसरे को करीब ला देतीं हैं, और मानसिक शक्ति का अहसास कर देती हैं ...................... पापा स्वयं आपको दीदी इसलिए कहते थे कि हम सब आपको नाम लेकर ना पुकारें, इसके पीछे निश्चित ही उनकी यही भावना थी कि आप सब भाई बहनों में बड़ी है और जब वह इस दुनिया में नहीं होंगे तो आप उनके स्थान पर मां-बाप दोनों का रोल अदा कर सके निश्चित ही उनकी बहुत गहरी भावना रही होगी और आज आपने अपने सरल व्यवहार से हम सब पर अपनी छत्रछाया बनाए रखें हम में से जब भी कोई कष्ट में होता है तो आप ही हमारे कष्ट के निवारण अर्थ सेतु बनाकर छात्र बनकर खड़ी रहती हैं हमारी कातर आंखें आपकी ओर ही निहारने लगती है आप अपना संरक्षण इस तरह आगे भी बनाए रखें यह तो प्रभु आशीर्वाद ही है हमारे लिए। Wishing you Ruby Anniversary विश्वास का यह बंधन यूं ही बना रहे, आपके जीवन में प्रेम का सागर यूं ही बहता रहे, दुआ है ईश्वर से सुख और समृद्धि से जीवन भरा रहे, शादी की सालगिरह की आप दोनों को ढेरों शुभकामनाएं। अपना आशीर्वाद यूं ही बनाए रखिएगा । फिर कुछ अन्य संस्मरणों के साथ........

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