Friday, October 6, 2023

जागरूकता ( स्व सुरक्षा)

वर्तमान में जिस प्रकार काम वासना में जकड़े हुए इंसानों के घृणित कर्म समाज के सामने आ रहे है , देखकर लगता है इसे रोकने के लिए किसी पुलिस या संगठनों की आवश्यकता नहीं है बल्कि महिलाओं और बालिकाओं को अपनी चेतन्य शक्ति को प्रज्वलित कर , आगे आकर डटकर सामना करना चाहिए। महिला सशक्तिकरण की बात करें तो पहले महिलाओं को ही अपने गुणों पर , योग्यता पर,साहस पर, विश्वास रखना होगा।ये गुण उन्हें विशेष बनाते हैं।
वे सब कर्तव्य कर सकती है जिसकी हिम्मत, सहनशीलता पुरुषों में नहीं होती।आज मेरे सम्मुख अनेक उदाहरण है।भले ही वे महिलाएं नामी शख्सियत ना हो लेकिन अपने बलबूते पर पारिवारिक, सामाजिक,सभी स्थितियों को चतुराई और कौशल से सम्हाल रही है। नौकरी में भी ऊंचे ओहदे पर आसीन हैं। पद को भी सुशोभित कर रही हैं। उनसे प्राप्त कुछ विशेष बातें जो हमें भी स्वयं कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है, जैसे पहले शारीरिक हावभाव का बहुत बड़ा योगदान होता है। चेहरे वेषभूषा और ऐसे व्यक्तित्व में नजर आये कि सामने देखने वाले के मन मस्तिष्क पर हमारे साहसी और कठोर होने का पूरा एहसास हो।
पहनाव सहज दौड़ने भागने के लायक हो। अपने पास सीटी ज़रूर रखना चाहिए। किसी अजनबी के साथ दोस्ती करना।मीठी मीठी बातें करना ,याअपने पर्स में बार बार हाथ डालना आदि हरकतें समस्या उत्पन्न कर सकती है। सुनसान जगह की माहिती होने पर मोबाइल में समीप के व्यक्ति का नम्बर तथा पुलिस नम्बर की जानकारी रखना जरूरी है।
लड़कियों को महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए डटकर मुकाबला करना होगा।तब अन्य विकल्प जो सरकार, समाज, संगठनों की ओर से प्राप्त होगें कामयाब सिद्ध हो सकते हैं। परिस्थितियों में स्वयं पर नियंत्रण रखना।
विशेष रूप से यह महसूस न हो कि हम बहुत डरे हुए हैं। बातचीत में दंभ वह रौब हो किसी अनहोनी घटना का निवारण करने तक औपचारिक नाटक का अभ्यास भी होना चाहिए।
एक बार मैं आटो में बैठी थी।रात हो रही थी।घर दूर था।आटो रिक्शा के अलावा दूसरा साधन नहीं था। युक्ति से चलना जरूरी था। मैं और रिक्शा वाला बस, रिक्शा तेज रफ्तार पर थी। तुरन्त मोबाईल निकाल कर जोर जोर से किसी बड़े अफसर से बातें करने का एहसास दिलाना शुरू किया, "हां जी आप चौराहे पर आ जाओ , फिर आपके साथ चलती हूं।"
मेरी बातें सुनते ही रिक्शा वाले ने रफ्तार कम की ।मेरा मोबाइल पर बोलने का पूरा नाटक था।चुप बैठे रहने से ख़तरे की घंटी बज सकती थी । इसीलिए गुड और बेड टच, तथा आवाज ध्वनि की पहचान हमे किसी हद तक सुरक्षित रख सकती है। तात्पर्य यह है कि जागते और जगाते रहने की प्रक्रिया से , विश्वास, हिम्मत से क़दम उठाना और नारी शक्ति को जागरूक करना और स्वयं में शक्ति सम्पन्न रहना परम कर्तव्य है।
अमिता मराठे स्व सुखाय इंदौर

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