Sunday, January 28, 2024

मेरा भारत देश निराला

हिमालय की चोटी, गंगा की धारा नदियों की पवित्रता विश्व में अपार यहां की संस्कृति और सभ्यता का विश्व कर रहा अनुकरण, गुण गान माटी की महक सोंधी और शीतल खट्टे_ मीठे रिश्ते प्यार भरी दोस्ती देती है सच्चा प्यार यहां की मिट्टी भिन्न भिन्न हैं भाषा पर भाव एक अनेकता में एकरूपता है समाती मनाते हैं पर्व सद्भाव से मिल सब हैं भिन्न भिन्न भाषाएं और बोली पर भाव और हैं सबके एक जैसे सांस्कृतिक धरोहर संजोके रखना यहां का राजा प्रजा को है भाता बना भारत सिर मौर पूरे जगत का डंका बज रहा देशके सनातनी का प्रकृति ने सजाया संवारा जतन से जान से भी ज्यादा इसे प्यार करते देवों की भूमि है ये अनूठी धरा जहां जन्म लेकर जीवन सुधारता राम, कृष्ण रूप मे लिया अवतार देवों ने और तारा है संतो असंतो स्वरचित ©® तनुजा शुक्ला यू. पी.

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