Tuesday, September 19, 2023

गणेश चतुर्थी पर विशेष

श्री विघ्नेश्वराय वरदाय सूरप्रियाय श्री गणेश ------ हिंदू पौराणिक धार्मिक मान्यता के अनुसार श्री गणेश जी भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं। गण का अर्थ स्वयं से उत्पन्न होना । माता पार्वती ने अपने उबटन यानी शरीर के मैल से गणेश जी को बनाया था। गणेश जी बुद्धि और चेतना के देवता है। गणेश स्त्रोत में शंकराचार्य जी कहते हैं ---
'अजं निर्विकल्पम निराकार मेकम 'अर्थात गणेश जी अजनमेय और निराकार है। श्री गणेश ब्रह्मांड की ऊर्जा के प्रतीक है ।श्री गणेश के हर अंग में कुछ ना कुछ तथ्य छुपा हुआ है। माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से श्री गणेश की आकृति बनाई और उसमें प्राण डाले अर्थात यह शरीफ मैल रूपी अज्ञानता से भरा हुआ है, जिसे हम बुद्धि और चेतना से जागृत कर सकते हैं। श्री गणेश का सिर काटने के बाद शंकर जी ने उनके सिर पर हाथी का सर लगाया था। हाथी कर्म, बुद्धि और सहजता का प्रतीक है। घमंड को परे हटाकर सरलता से ज्ञान की राह दिखाता है। गणेश जी का बड़ा सा पेट यह संकेत करता है कि बहुत सी कड़वी बातें, भले बुरे वाक्य अपने पेट में छुपा लेना चाहिए। यह पेट की उदारता को बतलाता है। संपूर्णता से सब स्वीकार कर लेने से मनुष्य सुखी और प्रसन्न रह सकता है। गणेश जी की छोटी आंखें एकाग्रता की प्रतीक है ।उनके बड़े से कान ग्रहण करने की क्षमता और दक्षता को दर्शाते हैं ।श्री गणेश गणेश चारभुजा धारी है। एक हाथ में लड्डू धारण कर धन-धान्य से संपन्न होने का आशीर्वाद देते हैं और महा दानी होने का संकेत भी देते हैं। दूसरा हाथ उठाकर वह रक्षा करने का संकल्प लेते हैं और वरदानी है। तीसरे हाथ में पकडा अंकुश जागृत होने का प्रतीक है और चौथे हाथ में पाश लिए हुए वह सृष्टि के नियंत्रण को के देवता कहलाते हैं। गहन बुद्धिशाली श्री गणेश प्रतिकों के माध्यम से अपने आप को दर्शाते हैं ,इसीलिए वे प्रथम पूजनीय श्री गणेश कहलाते हैं। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना की, तब श्री गणेश को ही लेखन का कार्य सोपा। गणेश जी ने अपने एक दांत को निकाल कर उससे महाभारत लिखी और वह एकदंत कहलाए ।
किसी भी शुभ कार्य से पहले श्री गणेश पूजे जाते हैं ,वह अग्रपूज्य, गणों के इश, स्वास्तिक रूप और प्रणव स्वरूप है। भाद्रपद शुक्ल की चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था और इसीलिए इस दिन गणेश चतुर्थी मनाई जाती है उनकी स्थापना होती है। गणेश जी में निराकार और साकार दिव्य ज्योति है। निराकार होते हुए उन्होंने अलौकिक आकार में जन्म लिया है और पूरी सृष्टि और परमाणु समूह का वे संचालन करते हैं ।श्री गणेश के 108 नाम है जिनमें एकदंत, विनायक, गजानन, लंबोदर, विघ्नराज, विघ्न नाशक, कपिल, विकट, गणाध्यक्ष इत्यादि प्रसिद्ध है। उनकी पत्नियां रिद्धि समृद्धि देती है और सिद्धि सफलता ।उनके बेटे शुभ और लाभ है। उनका वाहन मूषक बुद्धि और सफलता का प्रतीक माना जाता है। गणेश पुराण के अनुसार छंद शास्त्र में 8 गण है वही गण अक्षर है और उनके अधिष्ठाता देवता श्री गणेश है ।इसीलिए वे विद्या और बुद्धि के देवता कहलाते हैं। आधुनिक काल में हम श्री गणेश को विज्ञान के देवता कह सकते है। अतः ऋषि मुनियों के साथ लेखक, विद्वानों, विचारकों, छात्रों को श्री गणेश की पूजा अर्चना जरूर करनी चाहिए। वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभा। निर्विघ्नमं गुरु में देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।
सुषमा व्यास 'राजनिधि' इंदौर मध्य प्रदेश
विघ्न विनाशक मंगल दायक, जीवन के सब कष्ट निवारक |
मूषक वाहन, पार्वती नंदन , पिता है जिनके भोले शंकर ||
मातु पिता की परिक्रमा कर, प्रथम पूज्य गणपति कहलाए ||
विघ्नहर्ता सुखकर्ता बुद्धि प्रदाता, कहलाते हैं गौरीशंकर के लाला ||
लंबोदर हैं मोदक, दुर्वा प्रेमी , सिद्धि विनायक बुद्धि प्रदायक ||
मातु सरस्वती लक्ष्मी संग विराजें, धन_ धान्य बुद्धि साथ हैं लाते ||
गणपति बप्पा जग के रखवाले, सबके के बिगड़े काज सावरे ||
स्वरचित तनुजा शुक्ला यू. पी.

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